QUALITY COMES WITH A PRICE!
सस्ता इलाज पड़ सकता है भारी!
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| गलत इलाज़ करवाने से खर्चा कम नहीं होता बल्कि दोगुना हो जाता है! |
यह स्थिति बहुत ही चिंताजनक है क्युकी कई बार लोग जानकारी के अभाव या पैसों की कमी के कारण झोलाछाप के पास चले जाते है जिसके कारण इलाज के बाद बहुत पीड़ा सहनी पड़ती है!
मैं अपनी प्रैक्टिस के दौरान झोलाछाप द्वारा किए गए इलाज के दुष्प्रभावों का अनुभव आपसे साझा कर रहा हूं और आपको आगाह कर रहा हूं क्युकी इस तरह का इलाज करवाना बहुत ही हानिकारक है!
मेरे पास हाथरस उत्तर प्रदेश से एक महिला इलाज करवाने आयी, अपने इलाज के दौरान उन्होने मुझे बताया कि एक झोलाछाप से सस्ते इलाज के चक्कर में उन्होंने दांत निकलवाया जिसके बाद उनको आधे सर में बहुत दर्द होने लगा! यह दर्द लगातार बढ़ता ही गया और फिर उन्हें एक न्यूरोसर्जन से परामर्श लेना पड़ा! जांच में यह पाया गया कि दांत असावधानी से निकालने के कारण जबड़े की नस खराब हो गई है और अब उनको लंबे इलाज की जरूरत पड़ेगी!
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| दांत निकलवाने के बाद आधे सर में दर्द होना व् सुन्न हो जाना एक गंभीर समस्या है |
दूसरा उदाहरण टूंडला क्षेत्र का है जहां दांत बचाने के लिए आर सी टी करने के दौरान एक झोलाछाप डॉक्टर ने दांत में गलत इंजेक्शन लगा दिया जिसके कारण मरीज का आधा मुह सूज गया और उसे जान बचाने के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ा!
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| चेहरे पर आयी सूजन गलत इंजेक्शन लगाने के कारण हुई है |
मेरा आपसे निवेदन है की इलाज का खर्चा अधिक होने के कारण किसी भी झोलाछाप से सस्ता इलाज ना करवाए,यह इलाज भले ही आपको सस्ता पड़े परन्तु इसके बाद होने वाले दुष्परिणाम सामने आने पर बहुत परेशानी का सामना करना पड़ सकता है!ऐसा क्यों है, अाइए समझते है
- एक पढ़ा लिखा डॉक्टर किसी भी इलाज के दौरान इस्तेमाल होने वाले उपकरण, औजार व दवाइयों की पूरी जानकारी रखता है जबकि झोलाछाप इलाज करने के दौरान होने वाले अनुभव से सीखता है जो कि बहुत भयावह है! कोई इलाज गलत हो जाने पर या मरीज को कोई परेशानी होने पर उसे कैसे ठीक किया जाए इसकी जानकारी झोलाछाप को नहीं होती!
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| बच्चो का इलाज़ एक प्रशिक्षित डॉक्टर से ही करवाना चाहिए |
- डॉक्टर को संक्रमण से बचाव के लिए बहुत ही कठिन अभ्यास करवाया जाता है जिस से मरीजो को इलाज के दौरान किसी प्रकार का संक्रमण(इंफेक्शन) ना हो व घाव भरने में कोई परेशानी ना हो,जबकि झोलाछाप केवल परिस्थिति के हिसाब से काम करता है उसको इंफेक्शन का पता भी नहीं होता,उसके द्वारा इस्तेमाल किए गए उपकरण,इंजेक्शन व दवाइयां सुरक्षित नहीं होते है जिसके कारण घातक इंफेक्शन जैसे कि एच् आई वी ,एड्स व हेपेटाइटिस बी आदि हो सकते है जिसका पता बहुत बाद में लगता है!
- डॉक्टर को मरीज के सभी लक्षणों कि पूरी जानकारी के लिए कुछ जांच व एक्स रे की आवश्यकता होती ही है,परन्तु झोलाछाप इलाज का खर्च कम से कम करने के कारण जांच नहीं करवाते जिसके कारण बीमारी का इलाज सही तरह से नहीं हो पाता है!
- डॉक्टर अपने मरीजों व अपने कार्य के प्रति संवेदनशील होते है जबकि झोलाछाप केवल पैसा कमाने के लिए मरीज की जान से खिलवाड़ करते है !
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| मरीज़ो के प्रति संवेदना रखना हमारा कर्त्तव्य है |
इसलिए आप जब भी किसी इलाज के लिए अपने गांव के किसी डाक्टर पर जाए तो केवल प्राथमिक चिकित्सा केंद्र पर ही दिखाए, यदि किसी कारणवश कहीं और जाना पड़े तो डॉक्टर की डिग्री या सत्यता की जांच अवश्य करे!






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