गर्भावस्था में मुख की देखभाल कैसे करे?
बता रहे है डॉ स्पर्श निगम
गर्भावस्था स्त्रियों के लिए एक बहुत ही जीवनस्पर्शी व संघर्ष से भरा अनुभव है, यह समय किसी भी स्त्री के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है क्युकी इस समय शरीर में होने वाले बदलाव आपको एक नए जीवन के आने के लिए तैयार करते है!
प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाले हार्मोन्स के उतार चढ़ाव के कारण कई प्रकार की समस्या होने लगती है जैसे कि पैरो में सूजन ,कमर में दर्द व मसूड़ों में सूजन।
प्रोजेस्ट्रॉन एक प्रेग्नेंसी हार्मोन है जिसके कारण मसूड़ों की बीमारी उत्पन्न होती है खासतौर पर प्रेग्नेंसी के दूसरे से आठवें महीने के बीच में।
इस समय में होने वाले कुछ लक्षणों के बारे में आपको जागरूक होना आवश्यक है जो की इस प्रकार हैं
- मसूड़ों में सूजन- मसूड़ों में खुजली होना
- ब्रश करने पर मसूड़ों से खून आना
- मसूड़े के किसी भाग का बढ़ जाना या पस निकलना
इसलिए मेरा सुझाव है कि जैसे ही आपको अपने गर्भ धारण का पता चले,आप अपने दंत चिकित्सक से एक रूटीन चेक अप अवश्य करवाए,जिस से दांतो में मौजूद कोई भी बीमारी का पता पहले ही चल सके!
मेरी प्रैक्टिस में ऐसी कई महिलाएं आती है जो ज़्यादा अपने प्रेग्नेंसी के सातवें या आठवें महीने में होती है और उनको कुछ बड़ी दंत समस्या होने लगती है,और हम चाह कर भी केवल दवा देने के अलावा उनका कोई और इलाज नहीं कर सकते है क्युकी ऐसा करने पर होने वाले बच्चे को हानि हो सकती है!
यदि आपके दांतो में दर्द है या मसूड़ों में कोई तकलीफ़ है तो बिना डॉक्टर के सलाह के कोई भी दर्द निवारक या एंटीबायोटिक दवाएं ना ले,यह आपके बच्चो के शारीरिक विकास में बाधक हो सकती है और जन्म जात विकृति भी कर सकती है!हर एक महिला और हर एक नवजात शिशु कि स्वस्थता की ज़िम्मेदारी हम सब की है इसलिए आइए और सभी को जागरूक कीजिए !
यदि आपके मन में कोई सवाल है या दंत रोग समस्या संबंधी कोई जानकारी लेना चाहते है तो नीचे कॉमेंट बॉक्स में लिखें, में आपके सवालों का जवाब देने के पूरी कोशिश करूंगा!
डॉ स्पर्श निगम



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