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HORMONES AND ORAL HEALTH

क्या होर्मोनेस में आने वाले बदलाव हमारे मुख के स्वास्थ्य को  प्रभावित करते है?

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हार्मोनल स्थितियों की एक संख्या दांतो के पास के टिश्यू(पेरिओडोन्टल ) जैसे की मसूड़े,दांत की हड्डी आदि को प्रभावित करती है, जिसमें मधुमेह, गर्भावस्था और मीनोपॉज़  से जुड़े महिला सेक्स हार्मोन में उतार-चढ़ाव शामिल हैं।

स्टेरॉयड और थायरॉयड हार्मोन होमोस्टैसिस में परिवर्तन भी मुख को प्रभावित कर सकता है। हार्मोनल परिवर्तन सीधे पीरियडोंटल टिशूज को बदल सकते हैं, इसके अलावा, कुछ हार्मोनल स्थितियों की उपस्थिति में दंत चिकित्सा उपचार में परिवर्तन की आवश्यकता हो सकती है।
गर्भावस्था के दौरान आने वाले मसूड़ों में होने वाले बदलाव के कारण कई बार दन्त चिकित्सक को इलाज़ के लिए अधिक समय की आवश्यकता होती है 

हार्मोन और मौखिक स्वास्थ्य

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महिलाओ में होने वाले हार्मोनल बदलाव मुख को प्रभावित करते है 

विभिन्न हार्मोन मसूड़ों के रोगों के विकास या प्रगति को प्रभावित कर सकते हैं। यौवन, मासिक धर्म, गर्भावस्था और मीनोपॉज  के दौरान एक महिला के जीवन में हार्मोनल परिवर्तन होते हैं। शोध के आंकड़ों से पता चलता है कि उतार-चढ़ाव वाले महिला हार्मोन का स्तर मुंह के अंदर की स्थितियों को प्रभावित कर सकता है, जिससे बैक्टीरिया की वृद्धि, मसूड़ों  में रक्त का प्रवाह बढ़ सकता है, और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, जैसे कि भ्रूण की मृत्यु, पूर्व जन्म और हड्डियों का नुकसान हो सकता है।
  मसूड़ों में किसी भी तरह के इन्फेक्शन को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए,क्युकी यह बाद में कई बीमारियों का कारण बन सकता है 

गर्भवस्था के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव 

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प्रेगनेंसी का पता चलते ही एक बार डेंटल चेकअप अवशय करवाना चाहिए 

प्रोजेस्टेरोन(एक प्रेगनेंसी हॉर्मोन) के बढ़े हुए स्तर को मसूड़े  के रोगों का कारण माना जाता है, खासकर गर्भावस्था के दूसरे से आठवें महीने के दौरान। ब्रश करते समय मसूड़ों में दर्द, खुजली हो सकती है या खून भी आ सकता है। इसके अलावा, गर्भावस्था कभी-कभी मसूड़े की बहुत अधिक सूजन के साथ जुड़ी हो सकती है जिसे गर्भावस्था के एपुलिस / ग्रैनुलोमा कहा जाता है
मेरा आप सभी को सुझाव है की आपकी प्रेगनेंसी का पता लगते ही आपको एक डेंटल चेकअप ज़रूर करवाना  चाहिए क्युकी एक दन्त चिकित्सक प्रेगनेंसी के दुसरे व् तीसरे तिमाही में कोई भी एक्स रे व् अनेस्थेसिआ से सम्बंधित काम नहीं कर सकता है क्युकी इस से होने वाले बच्चे में समस्या हो सकती है 

यौवनवस्था के दौरान 

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यौवन के दौरान, महिला सेक्स हार्मोन के उत्पादन में वृद्धि होती है जो मसूड़ों में खून के प्रवाह को बढ़ा सकती है और मसूड़े में जलन पैदा कर देती है, जिससे मसूड़े  लाल, कोमल, सूजे हुए और सूजने लगते हैं। ब्रश करने और फ्लॉसिंग के दौरान खून बहता है।
प्रति 6 महीने में एक बार दांतो की सफाई करवाने से इस परेशानी से बचा जा सकता है,और हाँ इस से दांत कमज़ोर नहीं होते है !

मीनोपॉज़ के दौरान 

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महिला हार्मोन के स्तर में गिरावट के परिणामस्वरूप, इस चरण में महिलाओं को बदले हुए स्वाद, मुंह या जीभ की जलन, मुंह का सूखापन हो सकता है। साथ ही, इस अवधि के दौरान कम एस्ट्रोजन का स्तर हड्डियों के घनत्व को प्रभावित कर सकता है। यही कारण है की महिलाओ को दन्त रोग सम्बन्धी समस्या अधिक होती है क्युकी मीनोपॉज़ के बाद उनकी हड्डीओं से कैल्शियम कम होने लगता है !

यदि आपके मन में कोई सवाल है या दन्त रोग सम्बन्धी कोई समस्या है तो नीचे कमेंट बॉक्स में लिखे ,मैं आपके सवालो का जवाब देने की कोशिश करूँगा


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